Green Tea ke Fayde | Green Tea Benefits in Hindi (बनाने की विधि)

Green Tea Ke Fayde – सुबह खाली पेट पीने के फायदे, सोते समय पीने के फायदे, नींबू डालकर पीने के फायदे, नुकसान, मोटापा कैसे कम करें, बनाने की विधि।

आज दुनिया भर में वजन कम करने और मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने के लिए, लोग ग्रीन टी का प्रयोग करते हैं। इसके फायदे को देखते हुए, आज लोग इसका अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन इसको पीने का सही तरीका व समय क्या है। इस बात का ज्ञान, सभी को नहीं होता है। जिसकी वजह से यह फायदा करने के बजाय, शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकती है।

वैसे तो ग्रीन टी सभी मौसम में फायदेमंद होती है। लेकिन सर्दी के मौसम व बसंत ऋतु में, इसका पिया जाना अधिक फायदेमंद होता है। इसके सेवन से जहां हमारा शरीर डिटॉक्सिफाई होता है। वही हमारे शरीर में जमा चर्बी भी कम होती है।  शरीर की रक्त धमनियों में होने वाली रुकावट को भी दूर करता है।

हम जब भी ग्रीन टी के बारे में बात करते हैं। तो सबसे पहली चीज आती है कि यह हमारे वजन को कम करने में मदद करती है। लेकिन क्या आप आप वजन कम करने के लिए, ग्रीन टी को लेने का सही तरीका अपना  रहे हैं। अगर नहीं तो निश्चित रूप से, यह आपका वजन को कम करने की बजाय बढ़ा सकती है। इसलिए हर चीज का इस्तेमाल करने से पहले, उसका सही तरीका व उसके विषय में जानना बहुत ही जरूरी है। क्या आप जानना चाहेंगे : किडनी की बीमारी के 10 संकेतक्या किडनी ठीक हो सकती है। किडनी का रामबाण इलाज।

Green Tea ke Fayde

 ग्रीन टी क्या होती है

सामान्य चाय को पहले कैमेलिया साइनेंसिस पौधों से तोड़ा जाता है। फिर इनका एंजाइम ऑक्सीकरण किया जाता है। इनमें उपस्थित अतिरिक्त पानी को withering की प्रक्रिया द्वारा खत्म किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान पत्तियों में उपस्थित प्रोटीन, मुक्त अमीनो एसिड में बदल जाती है। जिसके कारण कैफीन भी की मात्रा बढ़ जाती है।

पत्तियों के ऑक्सीकरण को बढ़ाने के लिए, इनकी कटिंग की जाती है। इस दौरान इसमें मौजूद क्लोरोफिल को रासायनिक रूप से तोड़ा जाता है। चाय के स्वाद को बढ़ाने के लिए पॉलीफेनॉल व अमीनो एसिड से रासायनिक क्रिया करवाई जाती है। फिर इन पत्तियों को रोलिंग मशीन में डालकर, अलग-अलग आकर दिए जाते हैं।

इन सारी प्रक्रिया में बहुत सारे रासायनिक बदलाव होते हैं। जबकि ग्रीन टी की वेदरिंग नहीं की जाती है। इसे सीधे स्टीम किया जाता हैं। इनको ऑक्सिडाइज भी नहीं किया जाता है। बस इसको रोल करके, सुखाकर निकाल लिया जाता है। जिसके कारण इसके एंटीऑक्सीडेंट गुणों का नाश नहीं होता है। जबकि सामान्य चाय में एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज खत्म हो जाती है।

ग्रीन टी में Epigallocatechin Gallate  (EGCG) नाम का कंपाउंड पाया जाता है। जो ग्रीन टी में बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है। जोकि एंटीबैक्टीरियल, एंटीकैंसर,  एंटीवायरस के रूप में काम करता है। इसके साथ ही ग्रीन टी में कैफीन की मात्रा बहुत कम होती है। कैफीन का हाई डोज लेना खतरनाक होता है। ग्रीन टी में विटामिन सी भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। क्या आप जानना चाहेंगे : ईएसआर क्या होता है। ईएसआर बढ़ने से क्या होता हैईएसआर बढ़ने के लक्षण। ईएसआर कितना होना चाहिए।

ग्रीन टी में पाए जाने वाले पोषक तत्व

Green Tea – Nutritional Value
(Value per 100g)
उर्जा 102.71 (kcal)
प्रोटीन 20.42g
कार्बोहाइड्रेट 4.01g
क्रूड फैट 0.38g
कोलेस्ट्रॉल 0.00mg
विटामिन सी4.38mg
अन्य पोषक तत्व
क्वेरसेटिगट्रेस मात्रा
एजिनेनिनट्रेस मात्रा
मेथिलक्सैथिन• कैफीन
• थिओप्लाइन
• थियोब्रोमाइन
एसिड• लिनोलिक एसिड
• एमिनो एसिड
खनिज तत्व• मैग्नीशियम 
• कैल्शियम 
• मैंगनीज 
• लोह तत्व 
• क्रोमियम 
• तांबा 
• जस्ता
अस्थिर यौगिक• हाइड्रोकार्बन 
• एस्टर
• अल्डीहाइडस
• लैक्टोन

Green Tea ke Fayde
ग्रीन टी के फायदे 

ग्रीन टी कैमेलिया साइनेंसिस नामक पौधों की पत्तियों को सुखाकर तैयार की जाती है। दुनिया भर में उपलब्ध सभी प्रकार की चाय, इसी पौधे से तैयार की जाती है। लेकिन ग्रीन टी सबसे कम प्रक्रिया से तैयार होने वाली चाय है। इसलिए इसे अमृत कहना उपयुक्त होगा। इसे अमृत कहने के पीछे, जो फायदे छिपे हैं। उन्हें समझते हैं। क्या आप जानना चाहेंगे : शहद के फायदेशहद खाने के नुकसान। असली शहद की पहचान। शहद जहर कैसे बनता है।

1. अत्यधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स की  मौजूदगी – हमारे द्वारा खाया हुआ भोज्य पदार्थ, हमारा शरीर पचाकर एनर्जी में बदलता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बाय प्रोडक्ट्स के रूप में, फ्री रेडिकल्स पैदा होते हैं। जो हमारे शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। जिसकी वजह से उम्र बढ़ाने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। ग्रीन टी में केटेचिंस नाम के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। यह केटेचिंस हमारे शरीर में पैदा हुए, फ्री रेडिकल्स को कम करने का काम करते हैं। 

जिससे हमारी कोशिकाएं सुरक्षित रहती हैं। इन केटेचिंस के ग्रुप में EGCG नाम का एंटीऑक्सीडेंट सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट सबसे अधिक शक्तिशाली होता है। जो ग्रीन टी को औषधीय गुण देने के लिए, सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसीलिए ग्रीन टी को एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत माना जाता है।

2. कैंसर के खतरे से बचाव – हमारे शरीर की अनियंत्रित कोशिकाओं के विकास के कारण ही कैंसर पैदा होता है। कैंसर पूरे विश्व में, सबसे ज्यादा मृत्यु होने वाली बीमारियों में से एक है। कई रिसर्च से पता चला है कि ऑक्सीडेटिव डैमेज यानीकि शरीर में पैदा हुए, फ्री रेडिकल्स हमारी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। जिसके कारण शरीर में सूजन और जलन होती है। इसी को इन्फ्लेमेशन कहा जाता है।

इसी इन्फ्लेमेशन के कारण, कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां पैदा होती है। इसलिए ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, हमारे शरीर को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचते हैं। जिसकी वजह से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।  इनमें महिलाओं में होने वाला ब्रेस्ट कैंसर सबसे आम है। जो महिलाएं नियमित रूप से ग्रीन टी का सेवन करती हैं।

उनमें ब्रेस्ट कैंसर के खतरे की दर 20 से 30% कम हो जाती है। वही ग्रीन टी पीने वाले पुरुषों में भी प्रोस्टेट कैंसर का खतरा  कम हो जाता है। अगर किसी व्यक्ति को कैंसर है। तो वह डॉक्टर की सलाह से ग्रीन टी का इस्तेमाल कर सकते हैं। जिसके कारण, उन्हें कैंसर से उबर में फायदा मिल सकता है। क्या आप जानना चाहेंगे : लहसुन खाने के फायदेपुरुषों के लिए कच्चे लहसुन खाने का लाभ।

3. एंजायटी, डिप्रेशन व मूड स्विंग में फायदेमंद – अधिकतर लोगों को बेड-टी लेने की आदत होती है। अगर वह चाय नहीं पीते, तो वह फ्रेश नहीं फील करते या उन्हें प्रेशर नहीं आता। इसका मुख्य कारण, चाय में मौजूद कैफ़ीन तत्व है। यह कैफीन ग्रीन टी में भी कम मात्रा में मौजूद होती है। रिचर्स के अनुसार कैफीन हमारे मूड, हमारे फोकस और हमारी यादशक्ति को बेहतर बनाती है।

वैसे ग्रीन टी में सिर्फ कैफीन ही हमारे दिमाग को बूस्ट करने वाला तत्व नहीं है। इसके अलावा ग्रीन टी के अंदर एल-थिएमिन नामक अमीनो एसिड भी पाया जाता है। यह एल-थिएमिन हमारे दिमाग के अंदर, गाबा नामक तत्व की एक्टिविटी को बढ़ाता है। जिसके कारण हम रिलैक्स फील करते हैं। यह एंटी एंजायटी का भी असर पैदा करता है।

जिसके कारण स्ट्रेस भी कम होता है। ग्रीन टी में मौजूद एल-थिएमिन, हमारे दिमाग में डोपामिन और सेरोटोनिन नाम का भी प्रोडक्शन करता है। जो हमारे मूड को बेहतर बनाता है। इस तरह ग्रीन टी में मौजूद कैफीन और एल-थिएमिन मिलकर, हमारे दिमाग के काम को बेहतर बनाते हैं।

4. मोटापे को कम करने में सहायक – ग्रीन टी फैट बर्निंग में सहायक होता है। अगर फैट बर्निंग सप्लीमेंट की बात की जाए। तो इसमें एक इंग्रेडिएंट्स बहुत ही कॉमन होता है। जोकि ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट होता है। रिसर्च के अनुसार, ग्रीन टी हमारे मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है। यानी कि हम जो भी खाते हैं। उसे खाने को एनर्जी में बदलने की प्रक्रिया को तेज करता है।

हमारे शरीर में अलग-अलग जगह पर फैट इकट्ठा हो जाता है। यह फैट किसी को पेट में, किसी को कमर में या किसी के हिप्स में जमा होता है। जिसके कारण इन फैट सेल्स को एनर्जी में कन्वर्ट करना मुश्किल हो जाता है। इस फैट को कम करने के लिए, इन फैट सेल्स को अपनी जगह से हटाना जरूरी होता है।

यह काम ग्रीन टी में मौजूद कैफीन करता है। जब यह अपनी जगह से हट जाते है। तब यह फैट सेल्स एनर्जी में बदलने के लिए तैयार हो जाते हैं। इस बात का भी ध्यान रखना पड़ेगा कि ग्रीन टी के साथ-साथ हेल्दी खाना, एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफ़स्टाइल जमें फैट को कम करने में बहुत ही मददगार होते हैं। क्या आप जानना चाहेंगे : यूरिक एसिड की रामबाण दवायूरिक एसिड में क्या खाना चाहिए (सम्पूर्ण जानकारी व उपाय)।

5. दिमाग से संबंधित बीमारियों में लाभदायक – ग्रीन टी सिर्फ हमारे दिमाग के कार्यों को ही बेहतर नहीं बनाती। बल्कि बढ़ती उम्र के साथ होने वाली दिमाग की बीमारियों जैसे अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसे रोगों से भी रक्षा करता है। यह रोग आज बहुत तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। खास तौर पर अधिक उम्र के लोगों में। कई शोधों से पता चला है कि ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन्स हमारे दिमाग की न्यूरॉन्स की रक्षा करते है। जिसके कारण ये अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियों से बचते हैं।

ग्रीन टी में पॉलिफिनॉल्स नाम के तत्व भी  भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह पॉलिफिनॉल्स हमारे दिमाग में होने वाले इन्फ्लेमेशन को भी काम करते हैं। यानी दिमाग की कोशिकाओं में होने वाली जलन और सूजन को कम करते हैं।

6. मुंह की बदबू और दांतों के लिए फायदेमंद – ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन्स, एक एंटी बैक्टीरियल तत्व होता है। जो हमारे मुंह में पैदा होने वाले बैक्टीरिया को रोकने का काम करता है। जिसके कारण मुंह में होने वाले इन्फेक्शन का खतरा कम हो जाता है। हमारे मुंह में स्ट्रैप्टोकॉकस म्यूटन्स नाम का एक बैक्टीरिया होता है। 

यह बैक्टीरिया ही हमारे दांतों के अंदर प्लाक जमा करता है। इसी के कारण दांतों के अंदर कैविटी और सड़न शुरू हो जाती है। ग्रीन टी के सेवन करने से, इस बैक्टीरिया की ग्रोथ को रोका जा सकता है। जिससे मुंह से आने वाली बदबू से भी छुटकारा पाया जा सकता है। क्या आप जानना चाहेंगे : बड़ों के पेट में कीड़े होने के लक्षणपेट के कीड़ों का रामबाण उपाय। पेट में कीड़े होने का कारण व लक्षण।

7. टाइप 2 डायबिटीज रोकने में मददगार – आज भारत में 18 वर्ष से ज्यादा की उम्र के लगभग 7.7 करोड़ लोग टाइप टू डायबिटीज से पीड़ित है। जो एक चिंता का विषय है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि हर 11 भारतीयों में से, एक भारतीय  टाइप टू डायबिटीज का शिकार है। इसके साथ ही लगभग 2.5 करोड़ लोग प्री डायबिटिक है। जिन्हें निकट भविष्य में डायबिटीज का खतरा ज्यादा है।

इनमें से लगभग 50% लोग डायबिटीज की अपनी स्थिति से अनजान भी है। अगर इस पर जल्दी से जल्दी ध्यान में नहीं दिया गया। तो इसका इलाज करना मुश्किल भी हो  सकता है। टाइप टू डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल बहुत अधिक हो जाता है। जिसकी वजह से शरीर में इंसुलिन की सेंसिटिविटी कम हो जाती है।

कुछ रिसर्च से यह भी पता चला है कि ग्रीन टी पीने से इंसुलिन की सेंसिटिविटी को बढ़ाया जा सकता है। जिससे डायबिटीज को कंट्रोल में लाया जा सकता है। ग्रीन टी पीने से इंसुलिन की सेंसिटिविटी में सुधार हो सकता है। वही ब्लड शुगर लेवल को भी कम किया जा सकता है। 

जापान के एक शोध में पता लगा गया कि जो लोग नियमित रूप से ग्रीन टी का सेवन करते हैं। यानी दिन में चार से पांच कप का सेवन करते हैं। उनमें डायबिटीज का खतरा लगभग 42% कम हो जाता है।

8. हृदय संबंधी बीमारियों में कमी – हार्ट अटैक जैसी बीमारियों का मुख्य कारण हाई कोलेस्ट्रॉल होता है। अगर आपका कोलेस्ट्रॉल व ट्राइग्लिसराइड बढ़ा हुआ है। तो ग्रीन टी की मदद से एक्टिव कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद मिलती है। इसकी मदद से टोटल कोलेस्ट्रॉल तो कम होता ही है। साथ ही साथ बैड कोलेस्ट्रॉल यानी LDL व ट्राइग्लिसराइड भी कम होता है। ग्रीन टी के नियमित इस्तेमाल से, यह सारी चीज तो कम होती है। साथ ही HDL यानी गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता भी है। 

ग्रीन टी के अंदर बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं। जिसके कारण यह कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं से व दिल की बीमारियों से सुरक्षित रखती है। एक रिसर्च के अनुसार, जो व्यक्ति नियमित ग्रीन टी का सेवन करते हैं। उनमें दिल संबंधी बीमारियों में 31% की कमी पाई गई है। क्या आप जानना चाहेंगे :  थायराइड का रामबाण इलाजथायराइड के लक्षण – महिलाओं में थायराइड के लक्षण व कारण।

9. वजन घटाने में मददगार – वजन करने के कम करने के लिए ग्रीन टी बहुत ही फायदेमंद होती है। ग्रीन टी का नियमित इस्तेमाल करने से, हमारा शरीर फैट  अधिक बर्न करता है। विशेष रूप से हमारा टमी फैट व बैली फैट को बर्न करने में सहायक होती है। क्योंकि यह हमारे विसरल फैट को यानी कि पेट के अंदर पाए जाने वाले ऑर्गन्स के चारों ओर, जो फैट इकट्ठा होता है। उनका कम करने में मददगार होती है। 

इसके अलावा पेट के अंदर जो फैट का अवशोषण है। उसे भी कम कर देती है। इसके साथ यह हमारा मेटाबॉलिक रेट भी बढ़ती है। जिसकी वजह से यह ज्यादा कैलोरी बर्न होती है। जिसके कारण हमारा वजन कम होना शुरू हो जाता है। इसलिए ग्रीन टी का सेवन, वजन कम करने में बहुत सहायक होता है।

Green Tea Kaise Banaye
ग्रीन टी बनाने की विधि  

  ग्रीन टी बनाने के लिए सबसे पहले आपको एक कप पानी लेना है। या जितने कप आप चाय बनाना चाहते हैं। उतने कप पानी ले सकते है। अब इस पानी को 2-3 मिनट तक  उबालने दें। इस बात का ध्यान रखें कि पानी में ग्रीन टी को बिल्कुल भी उबालना नहीं है। अब पानी के उबलने पर, गैस को बंद कर दें।

फिर इसमें ग्रीन टी डाल लें। अगर आप टी बैग का प्रयोग करते हैं। तो इसमें एक टी बैग डालें। अब चम्मच की सहायता से इसे अच्छे से stir कर लें। फिर ढककर दो से तीन मिनट तक रख दें। ताकि ग्रीन टी का फ्लेवर पानी में आ जाए। फिर से चलनी से छानकर कप में निकाल ले। क्या आप जानना चाहेंगे : हार्ट अटैक आने से 1 महीने पहले ही शरीर देने लगता हैं ये संकेतहार्ट अटैक क्यों आता हैं। इसकी विस्तृत जानकारी।

आपको ग्रीन टी ऐसे ही पीनी चाहिए लेकिन अगर आप आपको इसका स्वाद पसंद नहीं आता है तो आप इसमें एक चम्मच शहद व नींबू का रस मिला सकते हैं अगर आपको डायबिटीज है या कैलोरीज काम लेना चाहते हैं तो अपग्रेडिंग आप शहर की जगह स्टीविया पाउडर या शुगर फ्री का इस्तेमाल कर सकते है। आपको इसमें शुगर का प्रयोग बिल्कुल भी नही करना चाहिए।

FAQ:

प्र० कौन सी ग्रीन टी नहीं पीनी चाहिए।

उ० बाजार में उपलब्ध डीकैफीनेटेड ग्रीन टी से बचें। क्योंकि डीकैफीनेटेड करना, एक रासायनिक प्रक्रिया होती है। जिससे कैफीन के साथ-साथ, अन्य तत्व भी निकल जाते हैं।

प्र० ग्रीन टी में कैफीन की मात्रा कितनी होती है।

उ० एक मग या 240 ml ग्रीन टी में 30 मिलीग्राम कैफीन, दूध चाय में 47 मिलीग्राम कैफीन और काफी में 95 मिलीग्राम कैफीन पाया जाता है।

प्र० ग्रीन टी किन-किन फॉर्म में उपलब्ध होती है।

उ० ग्रीन टी बाजार में टी-बैग्स के रूप में, लूज ग्रीन टी, ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट (कैप्सूल के रूप) में उपलब्ध होता है। इनमें सबसे अच्छा लूज ग्रीन टी होता है।

प्र० एक दिन में कितनी ग्रीन टी पी जा सकती है।

उ० एक दिन में 2 से 5 कप ग्रीन टी पी जा सकती है। किसी भी लाभप्रद चीज का अगर संतुलित सेवन करते हैं। तो वह अधिक फायदेमंद होता है।

प्र० ग्रीन टी कब नुकसान करती है।

उ० अगर किसी को एसिडिटी की समस्या है। तो उसे खाली पेट ग्रीन टी नहीं पीनी चाहिए। क्योंकि ग्रीन टी में टैनिन तत्व मौजूद होता है। ये हर प्रकार की चाय में होता है। जो पेट में एसिड का प्रभाव बढ़ा देता है।

प्र० ग्रीन टी कब लेनी चाहिए।

उ० ग्रीन टी का अधिक फायदा लेने के लिए, आप इसे खाने से 2 घंटे पहले या 2 घंटे बाद ले सकते हैं। खाना खाने के तुरंत बाद या पहले लेने से, जो खाने के पोषक तत्व होते हैं। वह अच्छे से अवशोषित नहीं हो पाते हैं।

Disclaimer      
लेख में सुझाए गए tips और सलाह केवल सामान्य जानकारी प्रदान करते हैं। इन्हें आजमाने से पहले, किसी विशेषज्ञ अथवा चिकित्सक से सलाह जरूर लें। myhealthguru इसके लिए उत्तरदायी नहीं है।

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