बवासीर के लक्षण | बवासीर क्यों होता हैं | बवासीर के मस्से को जड़ से ख़त्म करने का उपाय

बवासीर के लक्षण – क्या होता है, क्यों होता है, बादी व खूनी बवासीर के लक्षण, महिला व पुरुष में लक्षण, जड़ से खत्म करने का उपाय, क्या खाना चाहिए और क्या नही।

बवासीर एक ऐसी बीमारी है। जो आज हर दूसरे व्यक्ति को है। लेकिन हम उसे समय पर पहचान नहीं पाते। जिसके कारण हम उसका नुकसान लंबे समय तक भुगतते  रहते हैं। अगर हम इसी बवासीर को समय पर ध्यान दे दें। समय रहते, इसका इलाज कर लें। तो इससे होने वाले Complications व नुकसान से बचा जा सकता है।

आज बहुत से लोग, इस बीमारी से परेशान हैं। बहुत से लोग तो शर्म की वजह से, इसे छुपाते रहते हैं। तो वहीं बहुत से लोग, इसकी सर्जरी तक करवा लेते हैं। लेकिन इसका root cause कोई नहीं जाना चाहता। जब तक आप किसी भी रोग के कारण को नहीं जानेंगे। तब तक आप सिर्फ दवाइयों पर ही निर्भर रह जाएंगे। ऐसे में बवासीर का मूल कारण क्या है। कहीं आपकी कुछ गलतियां या लाइफस्टाइल ही, इसके लिए जिम्मेदार तो नहीं।

बवासीर वास्तव में, हमारे पाचन तंत्र से संबंधित एक रोग है। इसलिए अगर बवासीर को, आपको जड़ से खत्म करना है। तो आपको इसके कारणों को समझना जरूरी है। यह किस वजह से यह होता है। इसे समझना होगा। आपको अपने आहार विहार में क्या बदलाव करने चाहिए। यह समझना होगा। अगर आप इन बातों को समझ जाते हैं। तो आप पूरी तरह से, इस बीमारी से ठीक हो सकते हैं। क्या आप जानना चाहेंगे : बवासीर को जड़ से कैसे खत्म करेंइसकी सम्पूर्ण जानकारी कारण, प्रकार,लक्षण, घरेलू उपचार।

बवासीर के लक्षण

बवासीर क्या होता है

बवासीर मलद्वार के रास्ते में rectum व anal canal में होने वाला एक रोग है।  हमारे rectum में बवासीर होती है। जो बढ़कर anal canal तक आ जाती है। बवासीर एक खून का गुच्छा होता है। अगर इस खून के गुच्छे में, खून इकट्ठा हो जाएगा। तब वह बवासीर बन जाता है। हमारी खून की नसों में, खून का दबाव होता है। 

जब नसों में खून का दबाव ज्यादा हो जाता है। जिसको हम venous pressure बोलते हैं। तब खून की नसों में, खून इकट्ठा होना शुरू हो जाता है। इसमें एक दिन में, कुछ नहीं होता। बल्कि धीरे-धीरे खून का दबाव बढ़ता जाता है। फिर खून इक्कट्ठा होना शुरू हो जाता है।  इसी कारण धीरे-धीरे नशे फूलने लगती हैं। इन्हीं फूली हुई नसों को, हम बवासीर कहते हैं।

बवासीर होने का दूसरा तरीका है। जब हमारी मांसपेशियां कमजोर हो जाती है। हमारी खून की नसें, मांसपेशियों के ऊपर टिकी होती हैं। जब हमारी मांसपेशियां कमजोर हो जाएंगी। तब खून की नसें, नीचे की ओर लटकने लगती हैं। ये खिसककर नीचे भी आ जाती हैं। इसको भी हम बवासीर कहते हैं।            

बवासीर को अंग्रेजी में Piles कहा जाता है। जबकि मेडिकल भाषा में, इसे Hemorrhoids कहा जाता है। बवासीर तीन तरीके से हो सकती है। जिसको internal, external या internal-external दोनों तरीके की बवासीर कहा जा सकता हैं। बवासीर सामान्यतया खूनी व वादी होती है।

बवासीर क्यों होता है

 बवासीर होने का यह कारण है कि अगर आपके परिवार में, किसी को भी बवासीर की शिकायत है। तो आपमें भी इसके होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। जिसका सबसे मुख्य कारण, मलद्वार में दवाब का बढ़ना होता है। ऐसा इसलिए होता है। जब आप शौच के समय ज्यादा जोर लगाते हैं।

आपको कब्ज की शिकायत है। अगर आपको मोटापा है। अगर आप बहुत ज्यादा वजन उठाने का काम करते हैं। या फिर आपके भोजन में, फाइबर की मात्रा कम रहती है। अगर आपको बहुत गर्म व मिर्च मसाला वाला, खाना खाने की आदत है। आप अगर ऐसा कोई काम करते हैं। जिसमें अधिक देर तक बैठना होता है। वहीं महिलाओं में, इसका एक कारण गर्भावस्था होती है। क्या आप जानना चाहेंगे : कब्ज का परमानेंट इलाज पुरानी कब्ज के लक्षण। कब्ज के नुकसान। बदहजमी का घरेलू इलाज। कब्जियत के घरेलू उपाय।

बवासीर के लक्षण

  बवासीर होने से पहले, हमें जो लक्षण दिखाई पड़ते हैं। इनको जानकर, हम पहले से ही सजग हो सकते हैं। ताकि समय रहते,  इसका उपचार कर सकें। ऐसे लक्षण जो सामान्यतः किसी भी व्यक्ति, चाहे वह महिला या पुरुष हो, दिखाई देते हैं। तो आपको इस पर, अवश्य ध्यान देना चाहिए।

1. आपको stool pass करने में, देरी लगती है। सामान्य से 5 से 7 मिनट, ज्यादा लगते हैं। मल त्याग के बाद भी, आपको पूरी तरीके से संतुष्टि नहीं मिलती। आपको लगता है कि दोबारा जाना होगा। 

2. आपका पेट पूरी तरीके से साफ नहीं होता है। इसका कारण आपके मल का सूख जाना है। इसी वजह से, आप का मल पूरी तरह से pass नहीं हो पाता।

3. आपको wind pass करने में, काफी बदबू आती है। इसका कारण होता है कि गैस आपके रुके हुए, मल से गुजरते हुए आती है।

4. मलद्वार की जगह पर, आपको म्यूकस सा लग सकता है। आपको लग सकता है कि कुछ लिक्विड वहां से, discharge हो रहा है। 

5. इस म्यूकस की वजह से, कई बार उस जगह पर infection हो जाता है। फिर यहाँ पर खुजली महसूस होती है।

6. इसके कुछ समय बाद, आपको गुदाद्वार जलन-सी महसूस होती है। क्योंकि infection बढ़ जाता है। फिर उसमें सूजन हो जाती है। क्योंकि आप उस जगह पर खुजला देते हैं। फिर आपको इसमें दर्द महसूस होने लगता है।

यही सारी चीजें आगे चलकर बवासीर में परिवर्तित हो जाती है। इनके बारे में जानकारी रखकर, आप आसानी से इस stage पर बवासीर होने से बच सकते हैं। क्या आप जानना चाहेंगे : सुपर फूड आमला के गुण व फायदेकिन-किन रोगों मे लाभकारी।

बादी बवासीर के लक्षण

 इस प्रकार का बवासीर, गुदाद्वार के बाहर की ओर होता है। इसे external hemorrhoids या बादी बवासीर भी कहते हैं। यहां पर नसों की संख्या ज्यादा होती है। इसलिए ये ज्यादा painful होता है। कभी कभार, इसमें ब्लीडिंग हो सकती है।  आमतौर पर, इसमें बिल्डिंग नहीं होती है। जहां पर खुजली भी हो सकती है।

इसमें मुख्य समस्या होती है कि यहां पर दर्द रहता है। कभी-कभी ब्लीडिंग हो सकती है। कभी-कभी यहां पर अचानक से खून के गट्टे यानी थ्रांबोसिस जमा हो जाते हैं। यदि अगर thrombosed hemorrhoids है। तो यह अधिक पेनफुल होता है। इसमें कभी-कभी तुरंत सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है। बादी बवासीर में पेट की समस्याएं ज्यादा होती है। इसमें एसिडिटी व कब्जियत की समस्या होती है। क्या आप जानना चाहेंगे : मोटापा कैसे कम करेंमोटापा कारण , लक्षण, निदान व उपचार। मोटापे के रोगी क्या खाएं, क्या नही।

खूनी बवासीर के लक्षण

इस प्रकार का बवासीर गुदाद्वार के अंदर की ओर होता है। इसलिए इसे internal hemorrhoids या खूनी बवासीर भी कहते हैं। इस प्रकार का बवासीर पित दोष की वजह से होता है। इसमें सामान्यतया दर्द नहीं होता है। यह  काफी लोगों को होता है। जब इसमें सूजन आ जाती है। तो उसमें ब्लीडिंग होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। 

क्योंकि इसमें ब्लड सप्लाई अधिक मात्रा में होती है। खूनी बवासीर के मस्से bleeding होने के बाद, अपने आप अंदर चले जाते हैं। लेकिन अगर यह बवासीर पुराना हो जाता है। तो मस्से हाथ से दबाने पर भी अंदर नहीं जाते। कभी-कभी इसमें इतनी सूजन बढ़ जाती है। कि यह बाहर की ओर आने लगते हैं। तब यह पेनफुल भी होते हैं। 

इस प्रकार के बवासीर में मुख्य रूप से ब्लीडिंग होती है। अधिक ब्लीडिंग होने के कारण यह कमजोरी का कारण की बनते हैं। क्या आप जानना चाहेंगे :  तुलसी के फायदे10 Benefits of Tulsi।

बवासीर में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

बवासीर के मरीजों को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। बवासीर होने का मुख्य कारण कब्जियत होता है। कब्ज होने के कारण मल कठोर हो जाता है। मल कठोर होने के कारण, बवासीर में जो veins होती हैं। उनको चोट पहुंचाता है। जिसके कारण यहां पर दर्द होना, खुजली होना, ब्लड आता है। इसके लिए, हमें कोशिश करनी चाहिए। कि हमारा मल कठोर नहीं हो।

इसलिए रोज समय पर मल त्याग करें। इसके लिए रोगी, इस तरह का भोजन चुने। जिससे कब्ज की समस्या न हो। दूसरे जब वह मल त्याग करें। तो ज्यादा जोर न लगाना पड़ेगा। बवासीर होने का सबसे बड़ा कारण कब्जियत होना, मोटापे का बढ़ना, मल त्याग में ज्यादा जोर लगाना, ज्यादा देर तक खड़े या बैठे रहना होता है। हमें इन कारणों को हटाने पर ध्यान देना चाहिए।

बवासीर में चावल खाना चाहिए या नहीं

अक्सर बवासीर के मरीजों में प्रश्न आता है। कि उन्हें चावल खाने चाहिए या नहीं। तो बवासीर के मरीजों को चावल से  खाने से कोई नुकसान नहीं होता है। इस बात का ध्यान रखें कि आप किसी भी सूखी चीज का सेवन न करें। आप जिस चावल का सेवन कर रहे हैं। उसकी मात्रा और प्रकार पर ध्यान देना चाहिए।

बवासीर में सफेद या पॉलिश्ड चावल नहीं खाने चाहिए। क्योंकि यह कब्ज की समस्या का कारण हो सकते हैं। जो बवासीर की समस्या को और भी बढ़ा सकते हैं। लेकिन अगर आप चावल खाना ही चाहते हैं। तो आप ब्राउन राइस का अधिक सेवन करें। क्योंकि इसमें फाइबर की मात्रा भी उचित मात्रा होती है।

ब्राउन राइस में कार्बोहाइड्रेट, आयरन, मैग्नीज, फास्फोरस, फाइबर, विटामिन B6,  नियासिन, फैटी एसिड पॉलिश्ड चावल से दुगनी मात्रा में मौजूद होते हैं। जो कब्ज और बवासीर की समस्या में, मददगार साबित हो सकता है। चावल खाने के लिए, आपको इसमें अधिक दाल मिलाकर ही खाना चाहिए।

वहीं अगर आप सुखा चावल खाएंगे। तो आपको दिक्कतें बढ़ सकती हैं। बस अपनी diet में फाइबर की मात्रा को जरूर शामिल करें। पुरुषों के भोजन में 35 ग्राम कम से कम फाइबर होना चाहिए। वहीं महिलाओं में, इसकी मात्रा 25 ग्राम तक हो सकती है। क्या आप जानना चाहेंगे : शरीर में जमी गंदगी कैसे निकालेचाहे वह आपके फेफड़ों, आँतों, किडनी, त्वचा या शरीर के किसी भी अंग में क्यों न हो।

बवासीर में दूध पीना चाहिए या नहीं

 दूध पीना और न पीना, आपके शरीर पर निर्भर करता है। आपका शरीर दूध के प्रति किस तरह से प्रतिक्रिया करता है। यदि आपको दूध पीने से फ्रेशनेस महसूस होती है। आपको कब्ज की समस्या नहीं होती है। तो इसे अवश्य पीना चाहिए। वहीं अगर आपको दूध पीने से तकलीफ होती है। कब्ज की समस्या हो जाती है। तो उसे avoid करना चाहिए। या फिर आप कम मात्रा में भी इसे ले सकते हैं।

वैसे दूध खुद में एक natural laxative है। यह मल्टीविटामिन, विटामिन डी और कैल्शियम का अच्छा स्रोत  है। दूध में पाया जाने वाला लैक्टोज, हमारी सेहत के लिए फायदेमंद है। हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाता है। एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। दूध को न लेने का, कोई भी scientific reason अब तक नहीं नजर आया हैं। इसलिए बवासीर के मरीजों को दूध से कोई परहेज नहीं रखना चाहिए।

बस दूध में आधा चम्मच हल्दी अवश्य डालकर सेवन करें। क्योंकि हल्दी खुद में एक नेचुरल एंटीबायोटिक होती है। ये anti-inflammatory का काम करता है। इसलिए जो anus या anal canal के अंदर सूजन होती है। उन सभी को यह खत्म करने की क्षमता रखता है। अगर आप बवासीर के रोगी हैं। तो कोशिश करें कि हल्दी वाला दूध ही पिए। दूध हमारे संतुलित आहार का एक हिस्सा है। क्या आप जानना चाहेंगे : गठिया रोग की पहचान। गठिया के लक्षण व प्रकार। गठिया को जड़ से खत्म करने के उपाय

बवासीर में गर्म पानी पीने के फायदे

 हमारे शरीर का 60% हिस्सा पानी का बना हुआ है। वही हमारे दिल और दिमाग का 73% हिस्सा पानी स बना हुआ है। तो आप समझ सकते हैं कि पानी हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर आप सुबह गर्म पानी का सेवन करते हैं। तो आपका स्टेमिना बढ़ता है। आपके शरीर के अंदर से टॉक्सिंस बाहर निकलते हैं। इससे काफी हद तक कब्ज से भी छुटकारा मिलता है।

हमारा मेटाबॉलिक मजबूत होता है। जिससे पाचन तंत्र में भी सुधार होता है। पेट की एसिडिटी समाप्त हो जाती है। नियमित रूप से गर्म पानी का सेवन करने से, बवासीर में भी फायदा मिलता है। इससे पेट से जुड़ी समस्त बीमारियों में लाभ मिलता है। इससे हमारा मल मुलायम हो जाता है। यह हमारे एनल इंफेक्शन से भी बचाता है। इसके लिए आपको सुबह 300ml से 600ml तक गुनगुना पानी पीना चाहिए।

फिर धीरे-धीरे इसकी मात्रा को बढ़ा सकते है। आपको इसे सिप करके पीना चाहिए। जब भी आप पानी पिये, तो आराम से बैठ कर, शरीर को सीधा रखकर पीना चाहिए।  पानी में सोडियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, आयरन व पोटेशियम पाया जाता है। जो हमारे शरीर के लिए बहुत लाभकारी होता है। आपको इसका पूर्ण लाभ लेने के लिए, RO water को नहीं पीना चाहिए। क्योंकि इसमें यह तत्व नहीं पाए जाते हैं।

बवासीर के मस्से को जड़ से खत्म करने का उपाय

1. बवासीर के मस्से चाहे कितने भी फूले हुए हो। यह खूनी मस्से हो। यह बाहर की तरफ निकले हुए हो। इनमें कांटो जैसी चुभन होती हो। इन सभी के लिए रामबाण इलाज है। इसके लिए आपको अरंडी का तेल लेना है। जिसे कैस्टर ऑयल भी कहते हैं।

अब इस कैस्टर आयल को, धीमी आंच पर तब तक गर्म करें। जब तक इससे धुंआ न आने लगे। फिर आँच से, इस तेल को थोड़ा दूर कर लें। अब इसमें देसी कपूर, जिसे भीमसेनी कपूर भी कहते हैं। इसमें तेल की बराबर मात्रा में ही, कपूर का प्रयोग करना है। इस बात का ध्यान रखें कि कपूर ज1ब तेल गर्म हो रहा हो। तब मत डाले। वरना आग लगने का खतरा हो सकता है।

जब तेल और कपूर अच्छे से मिल जाये। तब इस तेल को ठंडा कर लें। फिर से इसे किसी शीशी में भरकर रख लें। जब मल त्याग कर लें। इसके बाद, इस तेल को सभी  मस्सों पर अप्लाई करें। इसे सिर्फ लगाना नहीं है। बल्कि हल्के हाथों से मालिश कर लें। ताकि तेल मस्सों के अंदर तक चला जाएं। इसका नियमित रूप से, प्रयोग करने पर, 7 से 10 दिनों में ही, आपको इसके परिणाम दिखने लगेंगे।

2. बवासीर के मस्सों को जड़ से खत्म करने  के लिए, दूसरा कारगर उपाय, इंद्रायण के बीच है। इसका प्रयोग करने के लिए, इन बीजों का चूर्ण बना लें। फिर इस चूर्ण को, कैस्टर आयल में मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को मस्से के ऊपर, हल्के हाथों से मालिश करें। इससे 2 महीने में ही, आपके बवासीर के मस्से जड़ से खत्म हो जाएंगे। क्या आप जानना चाहेंगे : सर्वाइकल का रामबाण उपचारइसके कारण, लक्षण व घरेलू उपचार के बारे में।

बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज

1. नमक जैतून से बवासीर का इलाज – बादी बवासीर वाले लोग, इस तरह अपनी दिनचर्या में थोड़ा सा बदलाव करके। इस समस्या से हमेशा के लिए, छुटकारा पा सकते है। इसके लिए सबसे पहले अपने भोजन में, लहसुन और अदरक का अधिक प्रयोग करें। जब भी कुछ खाएं, तो उसके बाद थोड़ी सी सौंफ अवश्य खानी चाहिए।

इसके साथ ही दिन में कम से कम 5 बार, जितना पी सके, उतना गुनगुने पानी का सेवन करें। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है कि आपको नमक जैतून लेना है। जो शुद्ध होना चाहिए। अब इसकी आधा ग्राम मात्रा, दिन में दो बार, पानी में मिलाकर पिए। इससे आपको बादी बवासीर या खूनी में भी शीघ्र लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

2. नींबू से बवासीर का इलाज – इस नुख्से को बनाने के लिए, आपको दो एंटीऑक्सीडेंट की जरूरत पड़ेगी। जिनके नाम Hesperidin और Diosmin है। यह दोनों एंटीऑक्सीडेंट नींबू के अंदर, भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। वास्तव में, यह दोनों एंटीऑक्सीडेंट नींबू के छिलके के नीचे जो  सफेद रंग का हिस्सा होता है। उसमें भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

इस remedy को बनाने के लिए, आपको एक पूरे छिलके सहित नींबू की पतली स्लाइस काट लेनी है। अब इससे बीजों को हटाकर, ब्लेंडर में डाल लें। इसमें आधा गिलास पानी और एक कटोरी स्प्राउट (अंकुरित कोई भी अनाज) लें। इन तीनों चीजों को, ब्लेंडर में अच्छी तरह से ब्लंट करें। इसकी एक smoothie बन जाएगी।  इसको आपको पीना है।

अगर आपको समस्या बहुत ज्यादा है। अगर आपके symptoms बहुत ज्यादा severe है। तो आपको रोजाना इसे दो बार लेना चाहिए। जब आपकी समस्या थोड़ी कम होने लगे। तो दिन में एक बार लेना शुरू करें। जब और आराम मिलने लगें। तो हफ्ते में, तीन बार ले। उसके बाद, आप इसे हफ्ते में एक बार ले सकते हैं। 

यह बहुत बढ़िया घरेलू उपचार है। जिससे आपको बवासीर में, बहुत ज्यादा लाभ होगा। इससे आपको pain, burning, itching में भी फायदा मिलेगा। आपके मस्से खत्म होने लगेंगे। आपकी कब्जियत भी ठीक होने लगेंगी।

Disclaimer

     लेख में सुझाए गए tips और सलाह केवल सामान्य जानकारी प्रदान करते हैं। इन्हें आजमाने से पहले, किसी विशेषज्ञ अथवा चिकित्सक से सलाह जरूर लें। myhealthguru इसके लिए उत्तरदायी नहीं है।

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